
नियती जैसे बाहर निकलने ही वाली थी, उस कमरे से तभी उसका हाथ किसी ने पकड़ा जेसै ही वो सर घुमातीं है पिछे देखतीं हैं रमा ने उसका हाथ पकड़ा था ' नियती बोलती है मेरा हाथ छोड दो मुझे नहीं रहना यहां मुझे धोखे से लाया गया है यहां मुझे राज से बात करनी है उस ने क्यों किया हमारे ऐसा
तभी रमा झटके से नियती हाथ पिछे मोड़ती है नियती दर्द से चिल्लाती है रमा बोलती है " चिल्लाते हुए तुझे सुनाई नहीं दिया अभी बाजी क्या बोल कर गई हैं कल से तु धंधे पर बैठे गी


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